खनिज

एमएमटीसी लिमिटेड, भारत का प्रथम सुपर स्टार ट्रेडिंग हाऊस, खनिज निर्यात के क्षेत्रा में गत चार दशकों से अब तक निरन्तर देश का प्रमुख निर्यातक बना हुआ है। गत दशक के दौरान एमएमटीसी अपने बाजारों में विविधता, उत्पाद श्रृंखला का विस्तार, व्यापक रूप से इन्फ्रास्ट्रक्चर सुविधाओं में वृद्धि तथा खनिज प्रचालन में सुविज्ञता एवं अपनी व्यापारिक वचनबद्धताओं का उच्चतम ध्यान तथा महत्व देने के साथ-साथ सेवाओं तथा उत्पादों की गुणवत्ता को भी ध्यान में रखते हुए अपने सतत् व अथक प्रयासों से विश्व बाजार के कडे वातावरण में अपना स्थान बना सकी है।

मूल्यवर्धन के क्षेत्रा में अपनी प्रतिस्पर्धा बढाने के लिए एमएमटीसी निरंतर प्रयासरत् है। अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में उच्च मूल्य प्राप्त करने के साथ-साथ जापान तथा दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों में आस्ट्रेलिया तथा ब्राजील जैसे अन्तर्राष्ट्रीय आपूर्तिकर्त्ताओं के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए एमएमटीसी ने बनीहट्टी तथा बेलारी-हास्पेट क्षेत्रा में क्रशिंग तथा स्क्रीनिंग संयंत्रा की स्थापना की है।

एमएमटीसी ने अयस्कों के मूल्यवर्धन को और प्रोत्साहित किया है। १.१ मिलियन टन की क्षमता वाला स्टील प्लांट विभिन्न प्रकार के लगभग २ मिलियन टन प्रतिवर्ष की खपत करता है जिसकी आपूर्ति एमएमटीसी द्वारा की जाती है। अयस्कों के निर्यात को प्रोन्नत करने के उद्देश्य से देश के खनन कार्यकलापों के आधुनिकीकरण के लिए आवश्यक पूंजीगत उपस्करों के आयात के लिए भी निगम ने पहल की है। ईपीसीजी योजना के अन्तर्गत लौह अयस्क के निर्यात को अर्थमूविंग उपस्करों के आयात के साथ जोडा गया।

 

 

एमएमटीसी की अद्वितीय स्थिति


विश्वव्यापी उत्कष्टता के चार दशक

Image विश्वव्यापी ग्राहक संतुष्टि द्वारा विश्वस्तरीय उत्कृष्टता के मानकों को पुनः परिभाषित करते हुए अयस्कों के निर्यात में विश्वव्यापी सफलता के साथ एमएमटीसी भारत का प्रमुख निर्यातक बनी हुई है। भारत से लौह अयस्क के कुल निर्यात का लगभग १५ प्रतिशत निर्यात करते हुए एक सबसे बडे आपूर्तिकर्त्ता के रूप में यह निरंतर अपना स्थान बनाये हुए है। इन्फ्रास्ट्रक्चर की सुविधाओं के गहन नेटवर्क का उपयोग करते हुए देश के खनिज संपन्न राज्यों के दूर दराज क्षेत्राों में सराहनीय उत्साह के साथ एमएमटीसी ने बल्क कार्यकलापों का प्रबन्धन करने के अतिरिक्त भारत के सभी प्रमुख बंदरगाहों से खनिजों का निर्यात किया है।

जापान, दक्षिण कोरिया तथा पाकिस्तान जैसे पारम्पारिक बाजारों में ekfdZfVax थ्रस्ट के कारण उत्कृष्टता के लिए एमएमटीसी की प्रवृत्ति सुदृढ हुई है। भारतीय लौह अयस्क के लिए चीनी बाजार को विकसित करने में एमएमटीसी एक उत्प्रेरक के रूप में कार्यरत् है।

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एमएमटीसी भारत का सबसे बडा विदेश व्यापार उपक्रम, खनिजों तथा अयस्कों के लिए विश्व बाजार में भारत की हिस्सेदारी को बढाने के लिए कटिबद्ध है। विश्व में अपनी संगत तथा दीर्घकालीन कार्यनिष्पादन के लिए निगम अपने सम्मानित संरक्षकों, सहयोगियों तथा भागीदारों का आभारी है जिनकी सहायता से यह विश्व मानकों के शिखर छू सकी।

 


एमएमटीसी - खनिजों की सफलता की कहानी

 
के्रताओं के प्रति वचनबद्धताएं

 

अन्तर्राष्ट्रीय मानकों का अनुपालन

राष्ट्र के खनिज निर्यात के क्षेत्रा में एमएमटीसी का कर्तव्य मात्राात्मक वृद्धि के कारणों से बाधित नहीं होता। एमएमटीसी कुछ महत्वपूर्ण योजनाएं बना रही है। जिनसे न केवल वर्तमान निर्यात स्तर पर टिका रह सकेगा बल्कि भविष्य में देश को निर्यात की चुनौतियों का सामना भी किया जा सकेगा।

भारत के लौह अयस्क के निर्यात में बढोत्तरी की एक रूकावट विशेषकर पूर्वीतट पर बंदरगाह की सुविधाओं का अभाव होना है परन्तु गोवा, मंगलोर बेलीकेरी आदि बंदरगाह मानसून की अवधि के दौरान मौसम की समस्या के कारण बंदरगाह के कार्यकलापों के बंद हो जाने जैसी समस्याओं से मुक्त है। इस दिशा में एमएमटीसी ने चैन्नई के समीप एन्नोर में अस्थायी लौह अयस्क टर्मिनल को विकसित करने का विशेष अधिकार प्राप्त किया है। यह सुविधा जुलाई २००४ से उपयोग में लाई जा रही है। विभिन्न गंभीर समस्याओं के बावजूद एमएमटीसी ने एन्नोर बंदरगाह से ०.५ मिलियन टन से अधिक की खेप भेजी है। निर्यात की बडी मात्राा के लिए आवश्यक व्यापक इन्फ्रास्ट्रक्चर के संभावित विकास के आकलन हेतु विभिन्न मंत्राालयों, रेलवे, पोर्टस तथा निर्यातकों से एमएमटीसी निरंतर वार्ता कर रही है। इस दिशा में एमएमटीसी निरंतर महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहेगी।

 

व्यापार की मदें

  लौह अयस्क
  मैगनीज अयस्क
  क्रोम अयस्क
  अन्य
(मड रसायन, बाईराईटस, बैन्टोनाईट, टेल्क, जिप्सम, फैल्सपार, क्वार्टज/सिलिका सैंड, गार्निट सैंड, काओलिन (चाईना कले, वर्मिकुलाईट)

संभार तंत्रा (लाजिस्टिक) सहायता

एमएमटीसी सभी लदान बंदरगाहों पर खेप के लिए कार्गो की उचित प्राप्ति, भंडारण, गुणवत्ता नियंत्राण तथा सुपुर्दगी की उचित सुनिश्चितता बनाए रखती है। यह संपूर्ण व्यवस्था वर्ष भर निरंतर रूप से करार किये गये खनिजों तथा अयस्कों की सुपुर्दगी की गारंटी देती है।

सभी बंदरगाह मशीनीकृत लदान सुविधा से सुसज्जित हैं।

मशीनीकृत बर्थ तथा हैंडलिंग सुविधाएं
  विजाग आउटर हार्बर चैन्नई आउटर हार्बर मारमुगाओ बर्थ (९)** पारादीप
आउटर चैनल

एम - मीटर्स

लम्बाई १४०० मी. ५९०० मी. ४५०० मी. २०२० मी.
चौडाई २५० मी. २४४ मी. २५० मी. १९० मी.
गहराई १९ मी. १९.२ मी. १३.७ मी. १५ मी.
 
आंतरिक प्रवेश
लम्बाई १२५० मी. ७८० मी. - ११०० मी.
चौडाई २५० मी. २२० मी. - १६० मी.
गहराई १९ मी. १८.६ मी. १३.१ मी. १२.८ मी.
 
टर्निंग बेसिन
व्यास ६१० मी. ५४९ मी. ४८० मी. ५२० मी.
गहराई १८ मी. १७.४ मी. ११.३ मी. १२.८ मी.
 
बर्थ
लम्बाई २६३ मी. २२२ मी. २२२ मी. १५५ मी.
गहराई १७.५ मी. १७.४ मी. ११.३ मी. १३.२ मी.
 
लोडर
ट्रेवलिंग दूरी २२५ मी. २०० मी. २०० मी
(२ लोडरों द्वारा)
१३८.७ मी.
आउटररीच २७ मी. २१.९ मी. २१.५ मी. २७.१ मी.
स्पष्ट ऊंचाई २१ मी. २०.५५ मी. २०.३ मी. १८.९ मी.
लदान दर ४००० मी./ प्र.घ ४००० मी./प्र. घ.*२ ४००० मी. टन/ प्रति घंटा *२ २५०० मी टन प्रति घंटा
एल ओ ए २७० मी. २७४ मी. ३३५ मी. २६० मी.
बीम ४८ मी. ४७.८ मी. ५० मी. ४० मी.
सेलिंग ड्राफट १६.५ मी. १६.२ मी. १३ मी. * १२.८ मी.


1. * ज्वार भाटे के साथ
2.

‘‘ १५ मई से सितम्बर अंत (मानसून) के दौरान फाईन्स की शिपमेंट के लिए बंद रहता है परन्तु वाश्ड् लम्प की शिपमैंट की जा सकती है। मानसून के दौरान सेलिंग ड्राफट ११ मी. तक सीमित रहती है। मानसून के दौरान भी किसी प्रकार की रात्रिा नेवीगेशन नहीं की जायेगी।

3.

३५,००० डीडब्ल्यूटी के कम के जहाजों को मिडस्ट्रीम में लोड किया जाता है। ऐसा या तो ट्रांसफर वैसल द्वारा अथवा शिप/ग्रेबस द्वारा अथवा मैन्यूल्ली किया जाता है जिसकी सुविधाएं उपलब्ध हैं।


निर्यात का गन्तव्य

एमएमटीसी लौह अयस्क का निर्यात जापान, दक्षिण कोरिया, चीन, मध्यपूर्व आदि को करती है। दीर्घावधि तथा वार्षिक स्पॉट करार दोनों के आधार पर निर्यात किया जाता है।


खनिज निर्यात में अग्रणी

खनिज व्यापार में एमएमटीसी के निष्पादन को कैपेक्सिल (केमिकल्स एंड एलाईड प्रोडक्टस एक्सपोर्ट प्रोमोशन काऊंसिल) ने निरंतर 20 वीं बार खनिज निर्यात में उत्कृष्टता के लिए देश के उच्चतम पुरस्कार से सम्मानित किया है।

 


बिक्री का तरीका

एमएमटीसी से खनिजों की बिक्री केवल एफओबी आधार पर ही की जाती है।